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==अकादमिक जीवन==
अम्माल [[वीमेन्स क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास]] में पढ़उलीं। ऊ [[मिशिगन विश्वविद्यालय]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]] में एगो बार्बर स्कॉलर के तौर पर कुछ बखत बदे रहलीं जहवाँ से १९२५ में आपन स्नातकोत्तर क उपाधि पउलीं। भारत वापसी के बादो अम्माल वी॰क्रि॰कॉ॰ में पढ़ावल जारी रखलीं। ऊ, पहिले ओरिएंटल बार्बर फेलो के तौर पर, फिर से मिशिगन चल गइलीं जहवाँ १९३१ में उनके डी॰एससी॰ क उपाधि मिलल। अम्माल वनस्पति विज्ञान क प्रोफेसर बन के लौटलीं आऊर महाराजा कॉलेज ऑफ साईंस, [[त्रिवेन्द्रम]] में १९३० से १९३४ तक पढ़वलीं।
==पुरस्कार आऊर सम्मान==
 
अम्माल के १९३५ में [[भारतीय विज्ञान अकादमी]] क आऊर १९५७ में [[भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी]] क फेलो चुनल गयल। मिशिगन विश्वविद्यालय १९५६ में उनके एलएल॰डी॰ क मानद उपाधि देहलै। भारत सरकार १९५७ में उनके [[पद्म श्री]] से सम्मानित कइलै। २००० में भारत सरकार क पर्यावरण और वन मंत्रालय उनके नाम पर [[वर्गीकरण विज्ञान]] के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार संस्थापित कइलै।
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