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राग-रंग क इ लोकप्रिय पर्व वसंत क सन्देश वाहको भी ह। राग मने संगीत अउरी रंग त एकर प्रमुख अंग हइये ह, लेकिन एकरा के उत्कर्ष तक पहुँचावे वाली प्रकृति भी इ समय रंग बिरंगा यौवन क संगे आपन चरम अवस्था पे होले। फागुन महीना में मनावल जाये क कारन एके फाल्गुनी भी कहल जाला ।
 
होली क त्योहार वसंत पंचमी से ही शुरू हो जालाजाला।{{refn|group=नोट|name=holicalendars|Since ।ओहीancient times, the Indian subcontinent has had several major [[Hindu calendar]]s, which places Holi and other festivals on different local months even though they mean the the same date. Some Hindu calendars emphasize the solar cycle, some the lunar cycle. Further, the regional calendars feature two traditions of Amanta and Purnimanta systems, wherein the similar sounding months refer to different parts of a lunar cycle, thus further diversifying the nomenclature. The Hindu festival of Holi falls on the first (full moon) day of ''Chaitra'' lunar month's dark fortnight in the Purnimanta system, while the same exact day for Holi is expressed in Amanta system as the lunar day of ''Phalguna Purnima''.<ref name=fuller292>{{cite book|author=Christopher John Fuller|title=The Camphor Flame: Popular Hinduism and Society in India|url=https://books.google.com/books?id=To6XSeBUW3oC|year=2004|publisher=Princeton University Press|isbn=978-0-69112-04-85|pages=291-293}}</ref> Both time measuring and dating systems are equivalent ways of meaning the same thing, they continue to be in use in different regions.<ref name=fuller292/><ref name="Reingold2008p275">{{cite book|author1=Nachum Dershowitz|author2=Edward M. Reingold|title=Calendrical Calculations|url=https://books.google.com/books?id=DPbx0-qgXu0C|year=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-88540-9|pages=123–133, 275–311}}</ref> In regions where the local calendar places it in its ''Phalguna'' month, Holi is also called ''Phaguwa''.}} ओही दिने पाहिले बार गुलाल उड़ावल जाला। एही दिन से फाग और धमार क गाना शुरू हो जाला। खेत में सरसो खिल उठेले। बाग- बगइचा में फूल क आकर्षक छटा छा जाला । पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। किसानों का ह्रदय ख़ुशी से नाच उठता है। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है। होली के दिन आम्र मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का बड़ा माहात्म्य ह।
 
==विवरण==
 
==नोट==
<references group="noteनोट"/>
 
==संदर्भ==
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