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उड़ीसा के इतिहासकार लोग के अनुसार, रसगुल्ला के आबिस्कार पुरी के मंदिर में भइल, जहाँ एकरा के ''खीरमोहन'' कहल जाय, बाद में इहे बिकसित हो के रसगुल्ला के रूप लिहलस।<ref name="ToI_Bishwa_2015"/> बतावल जाला कि ई परंपरागत रूप से जगन्नाथ मंदिर में देवी लक्ष्मी के "भोग" लगावे खाती इस्तमाल होखे।<ref>{{cite news | date = 5 July 2009 | title = Trinity take 'adhar pana' on raths | url = http://www.newindianexpress.com/states/odisha/article90964.ece#.UytBYlcqQ0M | newspaper = The New Indian Express }}</ref> लोकल कथा-कहानी के मोताबिक, भगवान जगन्नाथ के नौ-दिन के यात्रा (रथ यात्रा) पर बिना बतवले निकस जाए के कारन लक्ष्मी जी नराज भ गइली। एकरे बाद ऊ मंदिर के जय बिजय द्वार बन क लिहली आ दोबारा उनके लवटे पर भीतर ढुके से रोक दिहली। लक्ष्मी के खुस करे खाती भगवान जगन्नाथ उनुका के रसगुल्ला के भोग लगवलें। ई रेवाज आज के समय में "बचानिका" के नाँव से मनावल जाला जे "नीलाद्री बिजय" (भगवान के लवटानी) के हिस्सा हवे, मने के देवता के रथ यात्रा के बाद मंदिर में वापसी के चीन्हा हवे।<ref>{{cite news | author = Subhashish Mohanty | date = 3 July 2012 | title = Lord placates wife with sweet delight | url = http://www.telegraphindia.com/1120703/jsp/odisha/story_15682727.jsp#.UytFEVcqQ0M}}</ref><ref>{{cite news | date = 26 July 2010 | title = Sweet and sermon return for deities | url = http://www.telegraphindia.com/1100726/jsp/orissa/story_12725909.jsp | newspaper = The Telegraph | location = Calcutta}}</ref>
 
जगन्नाथ मंदिर पर रिसर्च करे वाला लोग, जइसे कि लक्ष्मीधर पूजापंडा आ जगबंधु पाधी नियर अनुसंधान करता लोग के कहनाम बा कि ई परंपरा आ रिवाज 12वीं सदी से चल आ रहल बा, ओही जमाना से जब वर्तमान मंदिर के निर्माण भइल।<ref name="ToI_citing_2015">{{cite news |author1=Mohapatra Bhattacharya |author2=Debabrata Kajari |date=31 July 2015 |title=Citing Rath ritual, Odisha lays claim to rasagulla, WB historians don't agree |url=http://timesofindia.indiatimes.com/city/bhubaneswar/Citing-Rath-ritual-Odisha-lays-claim-to-rasagulla-WB-historians-dont-agree/articleshow/48297818.cms |newspaper=Times of India|accessdate=1 अगस्त 2015}}</ref><ref name="Padhi2000">{{cite book | author=Jagabandhu Padhi | date=2000 | title=Sri Jagannatha at Puri | url=https://books.google.com/books?id=QHMeMwEACAAJ | publisher=S.G.N. Publications}}</ref> पूजापंडा के कहनाम भा कि नीलाद्री बिजय के जिकिर ''नीलाद्रि महोदय'' में मिले ला, जे शरत चंद्र मोहपात्रा के रचना हवे आ एकर समय 18अठारहवीं सदी हवे।<ref name="Mahapatra1994">{{cite book |author=Sarat Chandra Mahapatra |date=1994 |title=Car Festival of Lord Jagannath, Puri |url=https://books.google.com/books?id=sILXAAAAMAAJ |publisher=Sri Jagannath Research Centre}}</ref>{{page needed|date=जुलाई 2017}}<ref name="ToI_citing_2015"/> महापात्रा के अनुसार, कई गो मंदिर ग्रंथ सभ में, जे 300 बरिस से जादे पुरान बाड़ें, एह बात के सबूत मिले ला कि पुरी में रसगुल्ला चढ़ावल जाय।<ref>{{cite news |author=Debabrata Mohapatra |date= 29 July 2007 |title=Researchers Claim Rasgullas Were Born In Puri |newspaper=Theदि Timesटाइम्स ofऑफ Indiaइंडिया}}</ref>
 
लोककथा के मोताबिक, भुबनेश्वर के कुछ दूर पर मौजूद पहाला गाँव में बहुत गाई रहलीं सऽ आ गाँव के लोग इफरात दूध होखे के कारन फाजिल बचल दूध के बिग दे जब ऊ खराब हो जाय। जब जगन्नाथ मंदिर के एगो पुजारी ई देखलें तब उहे ओह गाँव के लोगन के दूध फार के छेना बनावे के तरीका सिखवलें आ रसगुल्ला बनावे के बिधी बतवलें। पहाला बाद में एह इलाका के सभसे बड़ छेना के बनल मिठाई के बजार के रूप में बिकसित भइल।<ref>{{cite news |author=Madhulika Dash |date=11 September 2014 |title=The Food Story: How India’s favourite sweet dish rosugulla was born |url=http://indianexpress.com/article/lifestyle/food-wine/the-food-story-how-indias-favourite-sweet-dish-rosugulla-was-born/ |newspaper = Indian Express}}</ref>
[[File:Bengali Sweets.svg|thumb|Bengali Sweets]]
 
एकरे बादो, एगो अउरी थियरी ई बा कि सुज्जी वाला रसगुल्ला पहिलहीं बंगाल में बने, केहू अउरी एकरा के आबिस्कार कइल, आ दास एकरा के बस पापुलर क दिहलें। ''बाग्लार खबर'' (1987) में पकवान के इतिहासकार प्रणब राय के दावा रहल कि केहू ब्रज मोहन नाँव के आदमी कलकत्ता हाई कोर्ट के लगे 1866 में रसगुल्ला लोग के सोझा ले आइल, दास के दुकान पर एकरा बिकाए सुरू होखे के दू बरिस पहिलहीं।<ref name="Michael_Oxford">{{cite book |url=https://books.google.ca/books?id=R1bCBwAAQBAJ&lpg=PA580 |title=The Oxford Companion to Sugar and Sweets |author=Ishita Dey |editor=Michael Krondl|publisher= |pages=580–581 |display-editors=etal}}</ref> साल 1906 में, पंचानन बंधोपाध्याय के लिखनी बा की रसगुल्ला उनईसवीं सदी में हरधन मोइरा, फुलिया के हलुआई, द्वारा पहिली बेर बनावल गइल जे राणाघाट के पाल चौधुरी लोग खातिर काम करें।<ref>{{cite news |date=29 September 2014 |title=The sweet legacy of Durga Puja |url=http://timesofindia.indiatimes.com/life-style/food/The-sweet-legacy-of-Durga-Puja/articleshow/43790152.cms |newspaper=Theदि Timesटाइम्स ofऑफ Indiaइंडिया}}</ref> बंगाल के हलुआइ समुदाय के एगो अखबार ''मिष्ठिकथा'' के हवाला से बतावल जाला कि अउरी कई गो हलुआई लोग अइसन मिठाई बनावे आ इनहन के नाँव अलग-अलग रहल जइसे कि ''गोपालगोला'' (बर्दवान जिला के गोपाल मोइरा द्वारा बनावल आ बेचल जाय), ''जतिनगोला'', ''भबानीगोला'' आ ''रसुगोल्ला''।<ref name="Michael_Oxford"/> पकवान आ भोजन के इतिहासकार माइकल क्रोंडल के कहनाम बा कि एक उत्पत्ती जवन भी होखे, ई बहुत संभव बा कि रसगुल्ला नबीन चंद्र दास के पहिले से बनत रहल। दास के उत्तराधिकारी लोग के चलावल जाए वाली कंपनी के एगो बोशर में ई हिंट मिले ला की: "ई बतावल मुस्किल बा कि अइसन मिळत जुलत मिठाई के कौनों अनगढ़ रूप ओह जमाना में कहीं अउरी रहल कि ना। अगर अइसन कुछ रहबो कइलें, ऊ नबीन चंद्र के क्वालिटी से मैच करे वाला ना रहलें, आ बंगाली थाली में रूचि जगावे में बिफल होखे के कारन, ऊ समय के साथ बिलुप्त भ गइलें।"{{efn|मूल कोटेशन: "it is hard to tell whether or not cruder versions of similar sweets existed anywhere at that time. Even if they did, they did not match the quality of Nobin Chandra, and having failed to excite the Bengali palate, they slipped into oblivion."<ref name="Michael_2011"/>}}
 
भगवानदास बागला, एगो मारवाड़ी बिजनेसमैन आ नबीन चंद्र दास के गाहक, दास की दुकान से बहरें दूर-दूर ले एह मिठाई के पापुलर कइलेन जे एकर भारी मात्रा में आडर दें।<ref>{{cite web |url=http://www.rediff.com/business/slide-show/slide-show-1-how-the-rasogolla-became-a-global-name/20111116.htm?print=true |title=How the rasogolla became a global name! |date=16 November 2011 |publisher=[[rediff.com]] }}</ref>
 
=== अइसने मिलत-जुलत ===
छेना गाजा आ छेना पोडा के साथे-साथ रसगुल्ला उड़ीसा के तीन गो प्रमुख मिठाई में से एक हवे। अब जबकि रसगुल्ला के बंगाल के साथ जुड़ाव के चलन बा, उड़ीसा के दूध फेडरेशन एह कोसिस में बा कि छेना पोडा के ओडिया मिठाई के रूप में पापुलर कइल जाव।<ref>{{cite news | author = Rajaram Satapathy | date = 15 अगस्त 2002 | title = Sweet wars: Chhenapoda Vs rasagolla | url = http://timesofindia.indiatimes.com/india/Sweet-wars-Chhenapoda-Vs-rasagolla/articleshow/19188687.cms | newspaper = Theदि Timesटाइम्स ofऑफ Indiaइंडिया }}</ref><ref>{{cite news | date = 11 April 2009 | title = Chew on This: Chenna poda | url = http://www.hindu.com/mp/2009/04/11/stories/2009041153080500.htm | work = Metro Plus Kochi | publisher = The Hindu }}</ref>
 
== नोट ==
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