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[[चित्र:Kumbh Mela2001.JPG|240px|thumb|[[इलाहाबाद]] के [[त्रिवेणी संगम|संगम]] पर 2001 के कुंभ मेला के एगो सीन।]]
; अन्हार पाख
* चउथ - — सकट चउथ, जेकरा संकष्टी गणेश चतुर्थी कहल जाला।
* एकादशी — षटतिला एकादशी।<ref>{{cite book |last1=पर्वतीय |first1=लीलाधर शर्मा |title=भारतीय संस्कृति कोश |date=1995 |publisher=राजपाल एंड संस |isbn=978-81-7028-167-2 |url=https://books.google.co.in/books?id=d92SwnSp04gC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA918&dq=%E0%A4%B7%E0%A4%9F%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%20%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A5%80&hl=hi&pg=PA918#v=onepage&q=%E0%A4%B7%E0%A4%9F%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%20%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A5%80&f=false |language=hi}}</ref>
* अमौसा - — [[मौनी अमौसा]]।
 
;अँजोर पाख
* पंचिमी - — [[बसंत पंचिमी]]।
* एकादशी — जया एकादशी।
* पुर्नवासी - — माघी पूर्णिमा।
 
;सुरुज के हिसाब से
* [[लोहड़ी]]
 
माघ महीना के अंजोर के पहिला नौ दिन [[नवरातर|गुप्त नवरातर]] होखे लें।<ref>{{cite book |last1=Bhalla |first1=Prem P. |title=ABC of Hinduism |date=22 अगस्त 2017 |publisher=Educreation Publishing |url=https://books.google.co.in/books?id=DN4xDwAAQBAJ&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA101&dq=gupt%20navratri&hl=hi&pg=PA101#v=onepage&q=gupt%20navratri&f=false |language=en}}</ref> ई देवी दुर्गा के पूजा के दिन हवें हालांकि, आम जनता द्वारा ना मनावल जालें। आम लोग, ब्यापक रूप से दू गो नवरातर मनावे ला: शरद के नवरात्र आ बसंत के नवरात्र जे क्रम से कुआर आ चइत के महीना में पड़े लें।
एकरे अलावा [[इलाहाबाद]] में माघ के महीना में पूरा महीना भर चले वाला [[माघ मेला|माघ मेला]] लागे ला। प्रयाग के [[त्रिवेणी संगम|त्रिबेनी संगम]] क्षेत्र में पूरा महीना भर लोग रह के गंगा नहान आ पूजा-प्रार्थना करे ला। एकरा के ''कल्पवास'' कहल जाला। माघ मेंला के प्रमुख नहान परब सभ में [[मौनी अमौसा|मौनी अमावस्या]], [[बसंत पंचिमी|बसंत पंचमी]] आ माघी पूर्णिमा होखे लें। हर बारहवाँ बरिस इहे माघ मेला [[कुंभ मेला]] के रूप में मनावल जाला आ तब एकर नहान परब [[शिवराति|शिवरात]] (महाशिवरात्रि, फागुन में पड़े ले) ले हो जालें।
 
एकरे अलावा [[इलाहाबाद]] में माघ के महीना में पूरा महीना भर चले वाला [[माघ मेला|माघ मेला]] लागे ला।<ref>{{cite book |last1=भार्गव |first1=गोपाल |title=उत्तर प्रदेश की कला एवं संस्कृति |date=2011 |publisher=Gyan Publishing House |isbn=978-81-7835-892-5 |url=https://books.google.co.in/books?id=ihlrKLrUF0QC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA205&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE&hl=hi&pg=PA205#v=onepage&q=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE&f=false |language=hi}}</ref> प्रयाग के [[त्रिवेणी संगम|त्रिबेनी संगम]] क्षेत्र में पूरा महीना भर लोग रह के गंगा नहान आ पूजा-प्रार्थना करे ला। एकरा के ''कल्पवास'' कहल जाला। माघ मेंला के प्रमुख नहान परब सभ में [[मौनी अमौसा|मौनी अमावस्या]], [[बसंत पंचिमी|बसंत पंचमी]] आ माघी पूर्णिमा होखे लें। हर बारहवाँ बरिस इहे माघ मेला [[कुंभ मेला]] के रूप में मनावल जाला आ तब एकर नहान परब [[शिवराति|शिवरात]] (महाशिवरात्रि, फागुन में पड़े ले) ले हो जालें।
==संदर्भ==
 
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
 
 
[[श्रेणी:हिंदू कलेंडर के महीना]]
 
{{हिंदू-आधार}}
70,252

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