'चिंह-जान'

भोजपुरी के धरती शब्द संस्कृत के "धारित्री" शब्द के अपभ्रंस रूप ह। एकर मतलब होला धारण करे में सक्षम " अथवा "जे धारण कइले बा " सब मानव जाती संस्कृति जलवायु ,खनिज ,रशायन आदि के धारण करे वाला सौर मंडल के जीवधारी ग्रह के धरती कहल जाला |

'धरती के उत्पत्ति'

धरती के उत्पत्ति आ एकरा प जीवन के उत्पत्ति के बारे में अभी तक प्रमाणित साक्ष्य के उपलब्धि नईखे। बिभिन्न प्रकार के बिज्ञान आ धर्मशास्त्र में धरती के उत्पत्ति आ एकरा प जीवन के उत्पत्ति के बारे में बिभिन्न प्रकार के तर्क आ सिद्धांत बा लेकिन एकरा में से कवनो के प्रमाणित नईखे मानल जा सकत। भोजपुरी संस्कृति में धरती के महतारी के दर्जा दिहल गइल बा संस्कृत में लिखल बा "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी " एह वाक्य में जन्म भूमि के जवन चर्चा बा वोकर मतलब धरती के कवनो बिशेष क्षेत्र ना ह बल्कि संतरा के आकर के सौर मंडल में शुक्र आ मंगल के बीच में स्थित पूरा धरती ग्रह के बारे में कहल गइल बा।

सौर निहारिका वाला सिद्धांत एह सिद्धांत के अनुसार धरती के उत्पति आज से लगभग 4 अरब 54 करोड़ बरिस पहिले सूर्य के टुटला से भइल रहे वोह समय में ई ग्रह आगि के जरत गोला नियन रहे एह सिद्धांत के अनुसार धरती के उत्पत्ति के दू गो काल चरण में बिभाजन कइल गइल बा एकरा के हेडियन समय आ आर्कियन समय के नाम से जानल जाला। धरती के उत्पत्ति के शुरू के समय के हेडियन समय आ धरती के उत्पत्ति के शुरू के समय से लगभग 73 करोड़ साल बाद आर्कियन समय के शुरुआत मानल गइल बा ई भी मानल जाला की आर्कियन समय में ही धरती पर जीवन के शुरुआत भइल होई ई जीवन "काई" के रूप में भइल होई। ई सिद्धांत के आधार धरती प मिलल कुछ पुरान चट्टान में स्थित कुछ पुरान डेट्राइटल ज़र्कान के कन के उमिर के मानल जाला अभीतक डेट्राइटल ज़र्कान के कन के उमिर 4 अरब 41 करोड़ बरिस पुरान तक मिलल बा।

थेइया वाला सिद्धांत

कुछ ज्ञानी लोग धरती के उत्पत्ति के बारे में कहे ले की धरती के उत्पत्ति दुगो बड़ ग्रह के टकरइला से भइल रहे एह सिद्धांत के अनुसार कवनो मंगल ग्रह से छोट अनजान ग्रह के ठोकर से धरती आ चन्द्रमा के उत्पत्ति मानल जाला यह सिद्धांत के आधार अपोलो कार्यक्रम के समय में चन्द्रमा प से धरती प ले आईलगयिल चन्द्रमा के चट्टान के कुछ अंश के अध्यन के मानल जाला। एह सिद्धांत में ठोकर देबे वाला ग्रह के "थेइया" कहल गइल बा एह सिद्धांत में कहल बा की "थेइया" के निर्माण सुरुज आ धरती से 15000000 किलोमीटर दूर, ओहनी के चौथा चाहे पांचवा लैग्रेन्जियन बिंदु पर पदार्थ के संचयन से भइल होई। शायद शुरू में थेयिका के गति कक्षा स्थिर होई लेकिन पदार्थ के बटोरयिला के कारन जब थेइया के भार जब बढे लागल तब उ डगमगा गइल होई लैग्रेन्जियन बिंदु के चारों ओर थेइया के घूमे के गति बढ़त गइल होई आ लगभग 4533000000 बरिस पाहिले उ टकरा गइल होई एह सिद्धांत अनुसार धरती के सुरुज से पाहिले के उत्पत्ति मानल गइल बा।

धर्म ग्रन्थ अनुसार धरती के उत्पत्ति

धर्म ग्रन्थ के श्रेणी में बेद के सबसे पुरान मानल जाला ई श्रिस्टी के रचयिता ब्रह्मा जी के मुह से निकलल शब्द मानल जाला ऋग बेद के नासदीय सूक्त एकरा में कुल 7 गो मन्त्र बा एह मन्त्र के के अनुसार श्रष्टी के उत्पत्ति से पाहिले अनादि पदार्थ (जेकरा के प्रकृति) कहल गइल बा के अलावा कुछ ना रहे धर्म शास्त्र में शिव के अनादि कहल गइल बा। घोर अन्धकार में शक्ति रूपी प्रकश में उत्पन्न रचयिता शक्ति के कामना रूपी बीज से सूरज चन्द्रमा आदि के साथ धरती के निर्माण भइल। कुर्रान ,बाइबिल आदि में भी धरती के उत्पत्ति के बारे में चर्चा बा लेकिन ई सब में भी सिद्धांत के भेद न होके सिर्फ संज्ञा के भेद मात्र बा।