अवधी हिंदी पट्टी के एगो भाषा ह। ई उत्तर प्रदेश के "अवध क्षेत्र" में (लखनऊ, रायबरेली, सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, अयोध्या, जौनपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कौशाम्बी, अम्बेडकर नगर, गोंडा, बस्ती, बहराइच, बलरामपुर , सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती अउर फतेहपुर) में बोलल जाले। एकरा अलावे एकर एगो शाखा बघेली के नाम से बघेलखंड में लोकप्रिय बा। 'अवध' शब्द "अयोध्या" से बनल बा। शासनकाल में एह नाँव के एगो डायोसिस रहे। तुलसीदास अपना "मानस" में अयोध्या के 'अवधपुरी' कहले बाड़े। अवध के एह इलाका के पुरान नाँव भी 'कोसल' रहल, जेकर महत्व प्राचीन काल से आ रहल बा।

नक्शा पर अवधी भाषा के क्षेत्र लाल रंग से
अवधी भाषा के बिस्तार वाला भूगोलीय इलाका

रामचरितमानस के रचना एही अवधी भाषा में भइल हवे। तुलसीदास के अलावा मालिक मुहम्मद जायसी एह भाषा के परसिद्ध रचनाकार हवें। वर्तमान समय में भी एह भाषा में साहित्य के रचना हो रहल बाटे।