इतिहास

पुराना समय के घटना आ उनहन के रिकार्ड, एह सभ के अध्ययन करे वाला बिसय

बीतल समय के अध्ययन कइल आ ओकरा के कौनों तरीका से दर्ज कइल इतिहास (अंगरेजी: History, हिस्ट्री) हवे। लिखाई के सुरुआत से पहिले के समय के अंगरेजी में प्रीहिस्ट्री कहल जाला। इतिहास एगो ब्यापक शब्द हवे जेह में खाली भर पुराना समय के घटने सभ ना आवे ला बलुक एह घटना सभ संबंधी यादगार, सामग्री के कलेक्शन, इनहन के सुबेवस्थित कइल, प्रस्तुत कइल आ बिबेचन कइल - ई सबकुछ सामिल बाटे। इतिहासकार लोग बीतल जमाना के बारे में ज्ञान हासिल करे के कोसिस करे ला आ एकरा खातिर इतिहासी सामग्री भा स्रोत सभ पर निर्भर करे ला जिनहन में पुरान अवशेष, लिखल सामग्री, मुँहजबानी चलल चलि आ रहल बिबरन-बरनन आ इकोलॉजिकल चीन्हा सभ सामिल बाड़ें।

इतिहास के आधार आ स्रोतसंपादन

इतिहास के मुख्य आधार युगविशेष आ घटनास्थल के उ अवशेष हवे जा जवन कौनौ ना कौनो रूप में प्राप्त होखेला। जीवन के बहुमुखी व्यापकता के कारण स्वल्प सामग्री के सहारे विगत युग अथवा समाज के चित्रनिर्माण करल दु:साध्य बा। सामग्री जेतने अधिक हो जायेला ओही अनुपात से बीतल युग तथा समाज के रूपरेखा प्रस्तुत करल साध्य हो जायेला। पर्याप्त साधनन के होते हुए भी ई नईखे कहल जा सकत बा कि कल्पनामिश्रित चित्र निश्चित रूप से शुद्ध या सत्य ही होखी। एहिसे उपयुक्त कमी के ध्यान रखके कुछ विद्वान् कहेलन जा कि इतिहास के संपूर्णता असाध्य जईसन बा, फिर भी यदि हमनी के अनुभव आ ज्ञान प्रचुर होई त, इतिहासी सामग्री के जाँच-पड़ताल से हमानी के कला तर्कप्रतिष्ठत होखे आ कल्पना संयत आ विकसित होखे त अतीत के हमनी के चित्र अधिक मानवीय आ प्रामाणिक हो सकत बा। सारांश ई बा कि इतिहास के रचना में पर्याप्त सामग्री, वैज्ञानिक ढंग से उ का जाँच, उ से प्राप्त ज्ञान के महत्व बुझे के विवेक के साथ ही साथ ऐतिहासक कल्पना के शक्ति तथा सजीव चित्रण के क्षमता के आवश्यकता बा। याद रखे के चाहिं कि इतिहास ना त साधारण परिभाषा के अनुसार विज्ञान ह आ ना केवल काल्पनिक दर्शन या साहित्यिक रचना ह। इ सबके यथोचित संमिश्रण से इतिहास के स्वरूप रचल जायेला।

इतिहास न्यूनाधिक ओही प्रकार के सत्य ह जईसन विज्ञान आ दर्शनन के होखेला। जवन प्रकार विज्ञान अ दर्शनन में हेरफेर होखेला ओही प्रकार इतिहास के चित्रण में भी होखत रहेला। मनुष्य के बढ़ते हुए ज्ञान आ साधनन के सहायता से इतिहास के चित्रन के संस्कार, ओकर पुरावृत्ति आ संस्कृति होत रहेला। प्रत्येक युग आपन आपन प्रश्न उठावेला आ इतिहास से ओकर समाधान खोजत रहेला। एहिसे प्रत्येक युग, समाज अथवा व्यक्ति इतिहास के दर्शन आपन प्रश्नन के दृष्टिबिंदुवन से करत रहेला। यह ई सब होते हुए भी साधनन के वैज्ञानिक अन्वेषण तथा निरीक्षण, कालक्रम के विचार, परिस्थिति के आवश्यकतन तथा घटनवन के प्रवाह के बारीकी से छानबीन आ उ से परिणाम निकाले में सर्तकता आ संयम के अनिवार्यता अत्यंत आवश्यक बा। उ के बिना इतिहासी कल्पना आ कपोलकल्पना में कोई भेद ना रह जाई।

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संदर्भसंपादन