मनोबिज्ञान, मनबेहवार के बिज्ञान हऽ, एह में सगरी सचेतन आ अचेतन अनुभव आ बिचार के सब पहलू के अध्ययन सामिल बा। ई एकेडमिक बिसय हवे आ सामाजिक बिज्ञानन में गिनल जाला। एह बिसय में कौनों सिंगल परानी (ब्यक्ति भा जानवर) या फिर अइसन परानी सभ के समूह के अध्ययन केस के रूप में भी कइल जाला आ अइसन केस स्टडी सभ के आधार पर आम नतीजा आ सिद्धांत भी बनावल जालें।

इतिहासी बिकास के क्रम में मनोबिज्ञान के परिभाषा भी बदलत रहल बा; आत्मा के बर्णन से सुरू हो के, मन के बिज्ञान, अनुभव (सचेत अनुभूति) के बिज्ञान, आ बिचार के बिज्ञान; आ अंत में बेहवार के बिज्ञान के रूप में परिभाषित कइल गइल बा।[1]

मनोबिज्ञान के अध्ययन करे वाला ब्यक्ति के मनोबैज्ञानिक कहल जाला। मनोबैज्ञानिक लोग के समाज बिग्यानी या बेहवार बिज्ञानी के रूप में भी देखल जा सके ला। मनोबैज्ञानिक लोग मानसिक फंक्शन सभ के ब्याक्तिगत आ सामाजिक बिचार-बेहवार पर परभाव के समझे के कोसिस करे ला।

मनोबिज्ञान के वर्तमान स्वरुप, एगो साइंस के रूप में, पच्छिमी बिचार, अध्ययन आ रिसर्च पर आधारित हवे हालाँकि कुछ बिद्वान लोग भारतीय मनोबिज्ञान के बात भी करे लें जे पच्छिमी मनोबिज्ञान से पहिले से मौजूद बा भले ई स्वतंत्र बिज्ञान के रूप में ना रहल बलुक दर्शन के शाखा के रूप में रहल।[2]

संदर्भEdit

  1. मिश्र, ब्रज कुमार. मनोविज्ञान : मानव व्यवहार का अध्ययन. PHI Learning Pvt. Ltd. पप. 5–. ISBN 978-81-203-3847-0.
  2. शर्मा, रामनाथ; रचना शर्मा (2004). भारतीय मनोविज्ञान. Atlantic Publishers & Dist. पप. 5–7. ISBN 978-81-7156-597-9.