महेंदर मिसिर

भोजपुरी भाषा के कवी

महेंदर मिसिर (16 मार्च 1865 – 26 अक्टूबर 1946[1]) भोजपुरी भाषा के कवी रहलें।[2] इनके खास पहिचान इनके लिखल पुरबी गीत सभ के वजह से भइल आ इनके "पूरबी सम्राट" भा "पुरबिया उस्ताद"[3] के उपाधि दिहल गइल। इनके जिनगी के ऊपर भोजपुरी लेखक पांडेय कपिल एगो उपन्यास फुलसुंघी लिखलें जे भोजपुरी साहित्य में खास महत्व वाला उपन्यास बाटे।[4] 1994 में रामनाथ पांडेय जी के उपन्यास महेन्दर मिसिर, जौहर साफियाबादी जी के पूर्वी के धाह, जगन्नाथ मिश्र जी द्वारा लिखित पुरवी के पुरोधा, तीर्थराज शर्मा जी द्वारा लिखित उपन्यास गीत जो गा न सका और भगवती प्रसाद द्विवेदी जी द्वारा प्रकाशित महेन्द्र मिसिर प्रमुख किताब बा जवना से महेन्दर मिसिर जी के बारे में जानकारी लेहल जा सकेला । महेन्दर मिसिर के योगदान देश के आजादी में भी काफी रहे । जवना घरी ब्रिटिश भारत में कागज के नोट ना छपत रहे तवना घरी मिसिर जी 5 रुपया, 10 रुपया आ 100 रुपया के नोट छाप के आ सब तरह के ओहघरी के प्रचलन वाला सिक्का बना के अंगरेजी राज के विरोध कइनी । क्रांतिकारी लोगन के मदद कइनी । दीन दुखिया गरीब कमजोर सब लोगन के मदद कइनी । नारी सम्मान खातिर आजीवन सफल प्रयास करत रह गइनी । 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के समाप्ति के समय जब प्लेग फइलल रहे आ अकाल पउ़ल रहे तब महेंदर मिसिर जी 90 हजार गिन्नी बंटवव ले रहीं आ ओह घड़ी 10 ग्राम सोना के कीमत 15 रुपया रहे । ताकि भूख से लोग के जान बांचे काहे कि अकाल के कारण अनाज के उत्पादन ना हो सकल रहे आ 6 महीना खातिर लोग राशन के व्यवस्था कर सके । महेन्दर मिसिर जी के करनी से सीख ले के 1943 में जर्मनी के शकसनहोजेन कैंप के गेस्टापो प्रमुख बर्नार्ड क्रूगर अंगरेजन के नोट छाप के जर्मनी के आजादी के रास्ता साफ कइले रहे । अग्निसाक्षी, 100 डेज, दलाल तथा गुलाम-ए-मुस्तफा जइसन हिट फिलिम के निर्देशक पार्थोघोष आ राज बहल मिल के भारत के आजादी के 50वां साल गिरह पर 104 करी के धारावाहिक महकेला माटी भोजपुरिया बनावल लोग जवन मॉरीशस टेलीवीजन पर पहिलका भोजपुरी सिरियल रहे आ इ महेन्दर मिसिर जी के रंगारंग जीवन पर आधारित रहे जवना में महेन्दर मिसिर जी के भूमिका शेखर सुमन जी कइलन । 1943 के महबूबा खान के निर्देशन में बनल फिलिम तकदीर में जद्दनबाई के जिद पर महेन्दर मिसिर जी के प्रसिद्ध ठुमरी के लिहल गइल जवन लाहौर से बॉम्बे तक शोहरत बटोरे में कामयाब भइल - बाबू दरोगा जी कवने कसुरवा धइले सइयां मोर । 1997 में राजगीर महोत्सव में भूपेन हजारिका जी के कार्यक्रम भइल रहे । ओह कार्यक्रम में भूपने हजारिका जी एगो ब्रेक लेला के बाद जब कार्यक्रम शुरु कइलें तब उ बिना केहु के फरमाईश के महेन्दर मिसिर जी के प्रसिद्ध गीत - हंसी हंसी पनवा खिअवले गोपीचनवा - गइलें आ 15-20 मिनट तक श्रोता लोग एह गीत में डूबल-इतराइल लोग आ फिर गीत समाप्ति के बाद एह गीत के कलकत्ता के संबंध आ महेन्दर मिसिर जी से संबंधित संस्मरण के मंच से सब के बतवलें रहलें आ इ सब बात उनका देहावसान पर प्रकाशित हिन्दुस्तान अखबार में छपल रहे ।

महेंदर मिसिर
जनम (1865-03-16)मार्च 16, 1865
निधन अक्टूबर 26, 1946(1946-10-26) (उमिर 81)
छपरा, बिहार
पेशा कवी
भाषा भोजपुरी
राष्ट्रीयता भारतीय
जुग ब्रिटिश काल
बिधा पूरबी, भजन, निर्गुण, गजल, दादरा, ठुमरी, बारहमासा
बिसय प्रेम, बिरह, भक्ती
साहित्य आंदोलन भोजपुरी के प्रथम महाकाव्य, अपुर्व रामायण की रचना
सक्रियता साल अंतिम क्षण तक यानी 1946 ई0 तक
संतान एक पुत्र हिकायत मिश्र
रिश्तेदार शिवशंकर मिसिर (बाबूजी)
गायत्री देई (महतारी)

संदर्भसंपादन

  1. by www.satyodaya.com. "जन्मदिवस : पुरबी सम्राट महेंदर मिसिर, भोजपुरी का एक महान सपूत | सत्योदय". Satyodaya.com. पहुँचतिथी 2018-03-18.
  2. Desk, Online (2014-10-26). "पहचान के मोहताज नहीं महेंदर मिसिर". Prabhatkhabar.com. पहुँचतिथी 2018-03-18.
  3. Khabar, Prabhat. "महेंदर मिसिर : पुरबिया उस्ताद". Prabhatkhabar.com. पहुँचतिथी 2018-03-18.
  4. "श्रद्धांजलि: पांडेय कपिल, महेंदर मिसिर, फुलसुंघी, भोजपुरी समाज और प्रेम". Sautuk.com. पहुँचतिथी 2018-03-18.