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[[File:Rain-on-Thassos.jpg|thumb|right|300px|खपड़ा पर बरखा क बुन्नी गिरत बा, [[यूनान]] क एगो दृश्य]]
[[File:Rain in Kolkata.jpg|thumb|right|300px|[[कलकत्ता]] शहर में बरखा]]
[[File:FoggDam-NT.jpg|thumb|right|300px|बरखा क दूर से देखल गइल एगो दृश्य]]
 
'''बरखा''' एगो [[मौसम]] से संबंधित घटना हवे जेवना में पानी [[बुन्नी]] की रूप में आसमान से जमीन पर गिरेला। ई [[वर्षण]] क एगो रूप हवे जेवना में पानी [[द्रव]] की रूप में नीचे गिरेला। बुन्नी की आकार की हिसाब से बरखा के फँकारी, झींसी, झींसा, बुन्नी कहल जाला। जमीन आ [[समुन्द्र]] से भाप बन के उड़े वाला पानी आसमान में ऊपर जा के [[संघनन]] की कारण बहुत छोट-छोट बुन्नी आ बरफ में बदल जाला जेवना से बादर बनेला। जब आपस में मिल के ई बुन्नी बड़ होजाली तब पृथ्वी की [[गुरुत्वाकर्षण]] से खिंचा के जमीन की ओर गिरे लागेली जेवना के बरखा कहल जाला।
 
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