कोरोना चाहे कॉरोना (अंगरेजी: corona; यूनानी भाषा मूल κορώνη से उपजल लातीनी शब्द जेकर मतलब "मुकुट" होला) प्लाज्मा के आभामंडल हवे जे सुरुज आ अन्य तारा सभ के सभसे बाहरी सतह के ऊपर पावल जाला। सुरुज के कोरोना के बिस्तार एकरे सतह से कई लाख किलोमीटर तक अंतरिक्ष में बाटे। एकरा के सभसे आसानी से पूर्ण सुरुज गरहन के समय देखल जा सके ला, बाकी समय में एकरा के कोरोनोग्राफ के मदद से देखल जाला।

पूरा सुरुज गरहन के समय सुरुज के कोरोना आ सुरुज के सतह के प्रामिनेंस के बिना कौनों यंत्र के मदद के खाली आँख भर से भी देखल जा सके ला।

स्पेक्ट्रोस्कोपी आधारित नापजोख ई साबित करे ला कि एह एरिया में भारी आयोनाइजेशन होखे ला आ एह प्लाज्मा के तापमान 1000000 केल्विन[1] बाटे जे सुरुज के सतह के तुलना में बहुते बेसी बा।

कोरोना से आवे वाली रौशनी मुख्य रूप से तीन किसिम के स्रोत से आवे ले। के-कोरोना (K-corona; K माने kontinuierlich, जर्मन में "लगातार" या "सतत") के उत्पत्ती सुरुज के रोशनी के द्वारा फ्री इलेक्ट्रान सभ के स्कैरिंग से होला; रिफ्लेक्ट होखे वाला फोटोस्फीयरिक एब्जार्प्शन लाइन सभ के एतना बेसी डाप्लर ब्राडनिंग हो जाला कि एह में कौनों एब्जार्पशन लाइन के चीन्हित ना कइल जा सके ला सभ एकलगातार स्पेक्ट्रम के रूप में देखलाई पड़े ला। एफ-कोरोना (F-corona (F इहाँ फ्राउनहॉफर खातिर हवे) के निर्माण सुरुज के किरन सभ के धूर के कन सभ से लड़ के छितरा जाए से होला आ एह में फ्राउनहॉफर एब्जार्प्शन लाइन देखलाई पड़ें लीं जे सुरुज के मूल प्रकाश में होखे लीं; ई एफ-कोरोना के बिस्तार सुरुज से बहुत बेसी इलांगेशन एंगल पर होला आ एकरा के जूडीक लाइट कहल जाला। ई-कोरोना (E-corona, E माने एमिशन) के निर्माण अइसन स्पेक्ट्रल एमिशन लाइन सब से बने ला जे कोरोना के प्लाज्मा में मौजूद आयन सभ द्वारा बने लीं; एह में बिस्तार वाली एमिशन लाइन देखलाई पड़े के कारन ई कोरोना के कंपोजीशन के बारे में जानकारी एकट्ठा करे में मददगार होला।[2]

संदर्भसंपादन

  1. Aschwanden, Markus J. (2005). Physics of the Solar Corona: An Introduction with Problems and Solutions. Chichester, UK: Praxis Publishing. ISBN 978-3-540-22321-4.
  2. Corfield, Richard (2007). Lives of the Planets. Basic Books. ISBN 978-0-465-01403-3.