साम्यवाद (अंगरेजी: Communism) एगो समाजिक, आर्थिक आ राजनीतिक बिचारधारा आ आंदोलन हऽ, जे एगो साम्यवादी समाज बनावे के बात करेला। ई बेबस्था मे सभे उत्पादन के साधन आ सम्पत्ति मे सउवे समाज के स्वामित्व होला चाहे सउवे समाज ओकर मालिक होला। साम्यवाद, समाजवाद के एगो हिस्सा मानल जाला।

साम्यवाद बहुते परकार के बिचार से मिल के बनल बा जेमे मार्क्सवाद आ अउरी सभ बिचार आवेला। जेमे सभ एह बात के बोलेला जे, समाज के अभी के क्रम पूंजीवाद, ओकर आर्थिक बेबस्था आ उत्पादन के तरिका से जनमल बा, माने एह परनाली मे दुगो प्रमुख सामाजिक वर्ग बा, इहे दुन्नो के लड़ाई समाज मे कुलि समस्या के जड़ बा आ एह स्थिति के आखिरके एगो सामाजिक क्रांतिये से फरियाइल जा सकेला।

एह दुगो वर्ग मे एगो होला मजूरा (काम करे वाला लोग; अंगरेजी: प्रोलेट्रियेट), जे रोज काम कर के ओह दिन के मजूरी लेवेला, आ ई लोग समाज मे बसी होला, आ जिंदा रहे ला ई लोग काम करहीं के पड़ेला; दुसरका वर्ग होला पूंजीपति (जेकरा लगे पइसा होला; अंगरेजी: ब्यूरॉजियोजी), ई लोग समाज मे मजूर लोग के मुक़ाबला मे बहुते कम होला बाकिर समाज के बेसी पइसा इहे लोग लगे रहेला; मजूरा लोग इहे लोग हियां मजूरी खटेला आ ई लोग ऊ लोग मजूरी देवेला। मजूर लोग के अधिकार दियावे ला क्रांति के गरज होला।

इतिहाससंपादन

रॉबर्ट्स पाइप्स कऽ अनुसार, बिना जात चाहे वर्ग के एगो बराबर समाज के बिचार पहिलका बेरा पुरान युनान (ग्रीस) मे जनमल। पंचमा सताब्दी मे ईरान के मज़दक आंदोलन के साम्यवादी मानल जाला काहे की ऊ उंच वर्ग के खिलाफ रहे। सोरहमा सताबदी के अंगरेजी लेखक थॉमस मोर के लेखन मे साम्यवादी बिचार लउकेला। सोरहमा सताबदी के लेख उटोपिया, संसाधन के एक मलिकई के बात करेला। 17 वा शताब्दी मे, कम्युनिस्ट बिचार फेनु इंग्लैंड मे आइल, जेने डिगर्स के रूप मे चिन्हल जाए अला एगो प्यूरिटन धार्मिक समूह भूमि के निजी स्वामित्व के उन्मूलन की वकालत कइलस।

सिधांतसंपादन