नदी में गिर रहल सीवर आ उद्योगिक इकाई के गंदा पानी।

पानी परदूषण भा जल प्रदूषण पानी के भंडार सभ में नोकसानदेह चीजन के प्रवेश से होला। नदी, झील, ताल, समुंद्र आ जमीन के नीचे के जलसोता सभ में सीधे या फिर अप्रत्यक्ष रूप से नोक्सानदेह पदार्थन के पहुँचे से उनहन में मौजूद पानी के क्वालिटी खराब हो जाला आ जिंदा जिया-जंतु आ बनस्पति सभ खातिर इस्तमाल लायक ना रह जाला। मनुष्य के कई तरह के काम से अइसन प्रदूषक तत्व सभ पानी में पहुँचे लें।

पानी परदूषण के परभाव खाली मनुष्य के सेहत पर ना पड़े ला बलुक सगरी जीवमंडल एकरा से परभावित होला। पानी के क्वालिटी के खराब होखे से खाली भर कौनों खास जीव, प्रजाति या प्रजातिन के जनसंख्या भर ना परभावित होल बलुक इलाका के पूरा इकोसिस्टम के सेहत पर खराब परभाव पड़े ला।

कानूनसंपादन

भारत में पानी प्रदूषण के रोकथाम खातिर 1974 में कानून बनावल गइल; 1977 में कुछ अइसन इंडस्ट्री सभ पर सेस लगावल गइल जे पानी के प्रदूषित करे लीं आ एह कानून में अंतिम बेर 2003 में बदलाव भइल रहे जे अबतक लागू बा।[1]

इहो देखल जायसंपादन

संदर्भसंपादन

  1. "Water Pollution". cpcb.nic.in. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड. पहुँचतिथी 10 मई 2020.